नई कंपनी कैसे शुरू करें | Nayi company kaise shuru kare

Nayi company kaise shuru kare: नमस्कार दोस्तों, अगर आप भारत में है और आपको एक नई कंपनी शुरू करनी है और भारत में कंपनी रजिस्टर करना है तो यह लेख आपके लिए है.

तो आइये जानते है nayi company kaise shuru kare या नई कंपनी कैसे बनाई जाती है.

कंपनी कैसे शुरू करना है ये जानने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है की आखिर कंपनी होती क्या है.

विषयसूची

कंपनी क्या होती है?(company kya hoti hai?)

  • जब कुछ चुने हुए और प्रशिक्षित लोग मिलकर एक संगठन चलाते हैं, तो वह एक कंपनी(company) बन जाती है और यह एक व्यवसाय है.
  • दुसरे शब्दों में: कंपनी व्यापारिक संगठन का एक रूप है, जिसका उपयोग विभिन्न तरह के सामान बेचने व खरीदने के लिए या सेवाओं को आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है.
  • कुछ कंपनियां लाभकारी संगठनों के रूप में काम करती हैं और कुछ कंपनियां गैर-लाभकारी संगठनों के रूप में भी काम करती हैं.
  • एक अकेला व्यक्ति किसी भी कंपनी को नहीं चला सकता, उसे चलाने के लिए और उस कंपनी के विकास के लिए कई कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उसे कई लोगों को रोजगार प्रदान करने की आवश्यकता होती है.
  • कंपनी का गठन और पंजीकरण भारतीय कंपनी अधिनियम 1956 के तहत किया जाता है, इससे कंपनी को कई लाभ मिलते है.
  • कंपनियों को यह हक होता है, कि वो दूसरी कंपनियों के शेयर खरीद कर उन्हें अपने नाम कर सकती हैं और कभी जरूरत पड़ने पर दूसरी कंपनियों पर मुकदमा भी कर सकती हैं.
  • एक कंपनी अपनी पूंजी वृद्धि के लिए या जरूरत पड़ने पर बाजार से पैसा उधार भी लेती है और अपने शेयर बेच कर पैसे इकट्ठा भी करती है.
  • कानूनी रूप से, सभी प्रकार की कंपनियों के समान अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं क्योंकि वे कंपनी अधिनियम 1956 के तहत गठित और पंजीकृत होती हैं.
  • कंपनियों के लिए जिम्मेदारी के रूप में कुछ कानूनी नियमों का पालन करना अनिवार्य है और यदि कोई कंपनी कानून द्वारा बनाए गए नियमों का उल्लंघन करती है तो यह उनके लिए दंडनीय अपराध है और कोई भी उन पर मुकदमा कर सकता है.
  • कंपनी में चार तरह के व्यक्ति शामिल होते है : प्रवर्तक (Promoter), संचालक (Director), अंशधारी (Shareholder), सम्पादक (Liquidator).

कंपनी के प्रकार (company ke prakaar)

कंपनी के प्रकार निम्नलिखित है:-

  • सीमित लोक समवाय(Public Limited Company)
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी(Private Limited Company)
  • संयुक्त उद्यम कंपनी(Joint-Venture Company)
  • साझेदारी फर्म(Partnership Firm)
  • एक व्यक्ति कंपनी(One Person Company)
  • एकल स्वामित्व(Sole Proprietorship)
  • गैर सरकारी संगठन (एनजीओ)(Non-Government Organization (NGO))

सीमित लोक समवाय(Public Limited Company)

यह एक ऐसी कंपनी है जो कानूनी तौर तरीकों के साथ कम से कम 7 सदस्यों द्वारा बनाई जाती है, एसी कंपनी को सार्वजनिक कंपनी कहते हैं.
इस कंपनी में कितने भी सदस्य हो सकते है, क्योंकि यह एक पंजीकृत(registered) कंपनी होती है.
इस कंपनी को अपने शेयर खरीदने और बेचने की पूरी छूट होती है.
कोई भी व्यक्ति जब इस कंपनी से जुड़ जाता है, तो वह भी सार्वजनिक कंपनी के अंतर्गत आ जाता है.

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी(Private Limited Company)

यह कंपनी एक ऐसी कंपनी है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति कंपनी अधिनियम(Companies Act) के तहत पंजीकृत(registered) होते हैं और एक अलग कंपनी बनाते हैं ऐसी कंपनी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कहते है.
जो लोग पंजीकृत होते है वह एक व्यवसाय स्थापित करते हैं और उससे संबंधित सभी प्रशिक्षित चीजों के बारे में जानकर एक कंपनी शुरू करते हैं.

संयुक्त उद्यम कंपनी(Joint-Venture Company)

संयुक्त उद्यम कंपनी जैसा कि नाम से पता चलता है, विदेशी और भारतीय निवेशकों के बीच साझेदारी से बनाई गई एक नई व्यावसायिक इकाई है, जिसमें साझेदार या पार्टनर संयुक्त रूप से लाभ, हानि, संचालन व्यय और अन्य जिम्मेदारियों को साझा करते हैं.
संयुक्त उद्यमों के लाभ यह हैं कि विदेशी कंपनी भारतीय साझेदार या पार्टनर के पहले से स्थापित संपर्क नेटवर्क, वितरण या डिस्ट्रीब्यूशन, मार्केटिंग चैनल्स और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग कर सकती है
एक संयुक्त उद्यम निवेशकों को नए व्यवसाय से जुड़े जोखिमों को संयुक्त रूप से प्रबंधित करने और देनदारियों को साझा करके अपने व्यक्तिगत जोखिम को सीमित करने की पेशकश करता है.

साझेदारी फर्म(Partnership Firm)

भारत में साझेदारी फर्म एक प्रकार की संयुक्त उद्यम कंपनी है.
एक साझेदारी फर्म के मालिकों को व्यक्तिगत रूप से साझेदार के रूप में जाना जाता है और सामूहिक रूप से एक फर्म के रूप में जाना जाता है.
पार्टनरशिप बिजनेस शुरू करने के लिए कम से कम दो लोगों की जरूरत होती है.
भागीदारों की अधिकतम संख्या दस है.
भागीदारों के पास असीमित देयता है और वे किसी भी पारस्परिक रूप से सहमत अनुपात में लाभ साझा कर सकते हैं.
साझेदारी फर्म का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है.

एक व्यक्ति कंपनी(One Person Company)

एक व्यक्ति कंपनी या वन पर्सन कंपनी (ओपीसी) 2013 से भारत में नई शुरू की गई कंपनी है.
ओपीसी(OPC) को शामिल करने की अनुमति केवल भारत के निवासी को है.
कोई भी विदेशी ओपीसी(OPC) को शामिल नहीं कर सकता है.
एक ओपीसी(OPC) का मालिक एक ही हो सकता है
इसे व्यक्तिगत उद्यमियों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पेश किया गया था.
यह एक प्रकार की निजी कंपनी है और इसी तरह एक अलग कानूनी इकाई के रूप में भी काम कर सकती है.
इसमें मालिक का दायित्व सीमित होता है.

एकल स्वामित्व(Sole Proprietorship)

भारत में एकल स्वामित्व एक तरह की व्यावसायिक इकाई का एक रूप है जहां एक अकेला व्यक्ति पूरे व्यावसायिक संगठन को संभालता है.
मालिक या व्यक्ति सभी लाभों का एकमात्र प्राप्तकर्ता होता है और व्यवसाय के सभी नुकसानों का वाहक भी होता है.
इस तरह की कंपनी में मालिक का दायित्व असीमित होता है.
एक एकल स्वामित्व व्यवसाय वहाँ उपयुक्त होता है जहां बाजार सीमित है, स्थानीयकृत है, और जहां ग्राहक व्यक्तिगत ध्यान को महत्व देते हो.
इस प्रकार की कंपनी तब उपयुक्त होती है जब आवश्यक पूंजी सीमित होती है और इसमें शामिल जोखिम बहुत बड़ा नहीं होता है.
कम कानूनी औपचारिकताएं होती हैं क्योंकि स्वामित्व का कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है.

गैर सरकारी संगठन (एनजीओ)(Non-Government Organization (NGO))

गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) या गैर-लाभकारी कंपनी एक नागरिक-आधारित संघ है जो सरकार से स्वतंत्र रूप से संचालित होता है, आमतौर पर किसी सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए.
इन संगठनों का उद्देश्य लाभ प्राप्त करना और समाज की भलाई के लिए किसी कारण या विकासशील परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए काम करना नहीं होता है.

कंपनी की सुविधाएँ या विशेषताएँ (Company ki suvidhayen ya visheshtayen)

निगमित निकाय(Corporate Body):
एक कंपनी को कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत होने की आवश्यकता होती है. किसी भी अन्य संगठन को कंपनी रजिस्ट्रार के साथ शामिल किया जाता है, और जो संगठन पंजीकृत नहीं किया जाता, उसे कंपनी के रूप में नहीं माना जा सकता है.

अपनी अलग कानूनी पहचान(Separate Legal Entity):
एक कंपनी एक अलग कानूनी इकाई के रूप में मौजूद होती है जो अपने शेयरधारकों और सदस्यों से अलग होती है. इस विशेषता के कारण, शेयरधारक कंपनी के साथ एक अनुबंध(contract) में बंध जाता हैं और कंपनी पर मुकदमा भी कर सकते हैं और अन्य कंपनी द्वारा मुकदमा भी चलाया जा सकता है.

सीमित दायित्व(Limited Liability):
चूंकि कंपनी एक अलग इकाई के रूप में मौजूद होती है, कंपनी के सदस्य कंपनी के ऋणों के लिए उत्तरदायी नहीं होते. किसी कंपनी के सदस्यों की देयता उनके द्वारा रखे गए शेयरों की सीमा तक या गारंटी राशि की सीमा तक सीमित होती है.

शेयरों की हस्तांतरणीयता(Transferability of Shares):
पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयरधारक अपने शेयरों को एसोसिएशन के लेखों में निर्धारित नियमों के अनुसार स्थानांतरित कर सकते हैं. हालाँकि, एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मामले में, शेयरों के हस्तांतरण(transfer of shares) पर कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं.

सामान मुहर(Common Seal):
फर्म एक व्यावसायिक इकाई या एक व्यक्ति है और इसलिए अपने नाम पर स्वयं हस्ताक्षर नहीं कर सकता है. यह एक सामान्य मुहर की आवश्यकता पैदा करता है जिसका उपयोग कंपनी की ओर से किए गए निर्णयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जा सकता है.

शाश्वत उत्तराधिकार(Perpetual Succession):
सरल शब्दों में, एक कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति है. इसलिए, इसमें उम्र पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है. मृत्यु, दिवाला, सेवानिवृत्ति या एक या सभी सदस्यों के पागलपन जैसे कारक कंपनी की स्थिति को प्रभावित नहीं करते हैं.

सदस्यों की संख्या(Number of Members):
कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, पब्लिक लिमिटेड कंपनी शुरू करने के लिए आवश्यक सदस्यों की न्यूनतम संख्या 7 है जबकि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए यह 2 है. एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के सदस्यों की अधिकतम संख्या असीमित हो सकती है जबकि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए यह 200 तक सीमित है.

नई कंपनी कैसे शुरू करें(Nayi company kaise shuru kare)

आज के दौर में नयी कंपनी शुरू करना बहुत से लोगो का सपना होता है लेकिन सबका सपना पूरा नही हो पाता क्यूंकि बहुत कम लोग ही सफल हो पाते है.

वेसे, इसका कारण यह नहीं है कि कंपनी खोलना और बॉस बनना काफी मुश्किल होता है, बल्कि इसलिए कामयाब नही हो पाते क्यूंकि लोग इसके मूल नियमों और प्रक्रिया से अवगत नहीं हैं.इसी कारण से उनका खुद का बिजनेस शुरू करने और उसे बढ़ाने का सपना अधूरा रह जाता है.

अगर आप भी अपनी कंपनी खोलना चाहते हैं तो जान लें इसके लिए क्या जरूरी है.

  • न्यूनतम उम्र 18 साल
  • आकर्षित नाम
  • सही जगह का चुनाव
  • रजिस्ट्रेशन(पंजीकरण)
  • न्यूनतम दो शेयर होल्डर
  • जरूरी डाक्यूमेंट्स
  • बेसिक- फास्ट ट्रैक
  • स्टैन्डर्ड- फास्ट ट्रैक
  • प्रीमियम- फास्ट ट्रैक
  • अपने डाक्यूमेंट्स सेफ रखें

Nayi company shuru karne ke liye न्यूनतम उम्र 18 साल होनी चाहिए

अगर आपकी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है तो उसका निर्देशक बनने के लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए. एक आम आदमी भी बिना डिग्री की आवश्यकता के निदेशक बन सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक विदेशी नागरिक भी एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का निर्देशक बन सकता है.

Nayi company का आकर्षक नाम होना चाहिए

सबसे ख़ास बात यह है की आपकी कंपनी का नाम आकर्षित होना चाहिए ताकि आपके ग्राहक भी attract हो सकें.

Nayi company के लिए सही जगह का चुनाव है जरूरी

कंपनी में जहां से काम होता है वहां अपनी कंपनी शुरू करने के लिए जगह की जरूरत होती है. यह जगह कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और रिहायशी इलाकों के अंदर भी हो सकती है बीएस आपके पास जगह होना चाहिए.

Nayi company shuru karne के लिए रजिस्ट्रेशन(पंजीकरण) कराना अनिवार्य है

अगर आप ऊपर दीए गए पॉइंट्स पर खरे उतरते है तो सबसे पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए. आजकल ऑनलाइन होने से यह प्रक्रिया बहुत आसान हो गई है, लेकिन फिर भी, एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पंजीकरण में दो सप्ताह का समय लग ही जाता है. वेसे पंजीकरण फॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से जमा किया जा सकता है.

Nayi company में न्यूनतम दो शेयर होल्डर होना चाहिए

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कम से कम दो डायरेक्टर और अधिक से अधिक 15 डायरेक्टर और कम से कम 2 शेयर होल्डर्स होना अनिवार्य है. इसके अलावा कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय (एम.सी.ए) की परमीशन के बाद 200 शेयर होल्डर्स भी रख सकते हैं।

Nayi company shuru karne के लिए जरूरी डाक्यूमेंट्स

कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सबसे पहले आपको फॉर्म आई.एन.सी-29 भरकर जरूरी डॉक्यूमेंट्स(पहचान पत्र, पैन कार्ड, एड्रेस प्रूफ, आइडेंटिटी कार्ड, वोटर आईडी, आदि) के साथ रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के ऑफिस में जमा कराना अनिवार्य होता है.

बेसिक- फास्ट ट्रैक

कंपनी को रजिस्टर्ड कराने के लिए फीस पैकेज भी बने हैं, जिनमें पहला पैकेज है बेसिक फास्ट ट्रैक जो की ₹15,899/- का होता है. इसमें सभी तरह की जरूरी फीस भी शामिल है जैसे की 2 डी.एस.सी, 2 डी.आई.एन, एम.ओ.ए, एओए, नाम की स्वीकृति, पैन, टैन और सरकारी फीस भी शामिल हैं.

स्टैन्डर्ड- फास्ट ट्रैक

स्टैन्डर्ड फास्ट ट्रैक पैकेज ₹19,899/- का है. इसमें अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सेटअप, शेयर सर्टिफिकेट और कंपनी फोल्डर आदि शामिल होते हैं. इसके बाद आप अपनी कंपनी के रजिस्ट्रेशन का काम शुरू कर सकते हैं.

प्रीमियम- फास्ट ट्रैक

प्रीमियम फास्ट ट्रैक पैकेज ₹5000/- का बना है. इसमें अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, शेयर सर्टिफिकेट, कंपनी फोल्डर और ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन शामिल हैं.

Nayi company के डाक्यूमेंट्स सेफ रखें

नई कंपनी खोलने के बाद करीब 1 साल तक समय समय पर आप रजिस्ट्रेशन कार्यालय से संपर्क रखें, इससे इस दौरान किसी भी नए बदलाव की जानकारी रहेगी. इसके अलावा अपने इंप्लाई भर्ती और प्रोडॅक्ट आदि के सभी जरूरी डाक्यूमेंट सुरक्षित रखें ताकि आगे कोई भी मुश्किल नहीं आए.

कंपनी को रजिस्टर कराना क्यों आवश्यक होता है(company ko register karana kyun important hota hai)

अगर आप भी एक कंपनी खोलने का सोच रहे है तो उसे सुचारू रूप से चलाने के लिए उसका पंजीकरण कराना बहुत जरूरी होता है. तो आइये जानते हैं, एक कंपनी को पंजीकृत कराने से आपको क्या फायदा होता है और आपको क्यों अपनी कंपनी पंजीकृत करानी चाहिए.

  • कंपनी का पंजीकरण कंपनी को मुख्य पहचान देता है:- कोई भी कंपनी सुचारू रूप से चलाने के लिए उसका पंजीकरण कराना बेहद आवश्यक होता है. क्योंकि यह कंपनी को एक मुख्य पहचान देता है.
    कंपनी कानूनी रूप से पंजीकृत करा ली जाती है तो वह आसानी से उपभोक्ताओं के उत्साह पर भरोसा दिलाने के लिए सक्षम हो पाती है.
    पंजीकरण कराने से आपकी कंपनी को एक कानूनी नाम, पता व पहचान प्राप्त हो जाता है. अगर आपकी कंपनी का नाम आप एक बार पंजीकृत करा लेते है तो वो नाम कोई दुसरा उसकी कंपनी के उपयोग में नही ले सकता या आसन शब्दों में आपकी कंपनी के नाम को कोई भी व्यक्ति अपनी कंपनी के नाम के लिए उपयोग नहीं कर सकता है.
  • यह आपको व्यक्तिगत दायित्व से बचाता है:- अगर आप अपनी कंपनी को पंजीकृत करा लेते है तो कंपनी में हुए कोई भी नुक्सान की भरपाई आपको व्यक्तिगत रूप से नही चुकानी पड़ेगी यानि इस नुकसानकी भरपाई आपके घर की किसी भी वस्तु को बेचकर नहीं की जा सकती है क्योंकि आपकी कंपनी पंजीकृत है.
  • आप ग्राहक को आसानी से आकर्षित कर सकते है:- शुरुआत में किसी भी कंपनी या उसके प्रोडक्ट्स पर विश्वास करना थोडा मुश्किल होता है लेकिन एक पंजीकृत कंपनी या कहें उसमे मौजूद सदस्य उस प्रोडक्ट को इतना आकर्षित बना देते है की ग्राहकों को विश्वास दिलाना और आकर्षित करना आसान हो जाता है.
  • कंपनी के लिए निवेशक आसानी से प्राप्त कर सकते है:- किसी भी कंपनी को चलाने के लिए पूरी वित्तीय राशि की आवश्यकता होती है. ऐसे में कोई एक व्यक्ति पर्याप्त धन नहीं जुटा सकता, आप कंपनी चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन जुटा सकते हैं.
    ऐसे में कंपनी को कुछ निवेशकों की जरूरत होती है या फिर कंपनी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी बैंक से कर्ज लेती है, जिसके लिए उस कंपनी को पंजीकृत कराना बेहद जरूरी होता है. अगर आपकी कंपनी पंजीकृत नही है तो ऐसे में कोई भी निवेशक निवेश नही करता.
  • लंबे समय तक व्यापार चलाने के लिए:- कुछ लोग छोटे पैमाने पर व्यापार शुरू करते है और उस समय वो कंपनी को पंजीकृत नही कराते, ऐसे में पता नही वो लोग कब तक व्यापार करना चाहते है.
    लेकिन अगर आप आपके व्यापार को एक स्टेप आगे ले जाना चाहते है तो आपको कंपनी पंजीकृत करवा लेनी चाहिए.

कंपनी रजिस्टर करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़(Company Register karne ke liye important documents)

  • Company को पंजीकृत करने के लिए कंपनी में मौजूद सभी प्रबंधकों के पहचान प्रमाण की एक फोटोकॉपी के साथ-साथ उनके पते का प्रमाण होना आवश्यक है.
  • Company के रजिस्ट्रेशन के समय सभी प्रबंधकों(directors) के पैन कार्ड की फोटोकॉपी होना भी अनिवार्य है.
  • अगर आपने ऑफिस के लिए अपनी जमीन खरीदी है तो उसका प्रमाण पत्र, नहीं तो ऑफिस के लिए कोई जमीन गिरवी या किराए पर ली है तो उसके प्रमाण पत्र(lease agreement/rent agreement) की फोटो कॉपी भी रजिस्ट्रेशन के समय जरूरी है.
  • अगर आपने कोई जमीन किराए पर ली है तो आपके पास उसके मालिक से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र(no-objection certificate) होना अनिवार्य है.
  • जो व्यक्ति अपनी कंपनी का पंजीकरण कराना चाहता है, उसके लिए अपना स्वयं का पहचान प्रमाण और अपनी पंजीकृत ई-मेल आईडी का प्रमाण पत्र भी वहां प्रस्तुत करना अनिवार्य है.
  • कंपनी पंजीकरण के समय कंपनी के मालिक के बैंक स्टेटमेंट की फोटोकॉपी और किसी अन्य प्रकार के बिल(बिजली बिल, टेलीफोन बिल) की फोटोकॉपी जमा करना अनिवार्य है.

नई कंपनी को पंजीकृत कैसे करें (Nayi company ko register kaise kare)

अपनी कंपनी को कानूनी रूप से शुरू या पंजीकृत करने के लिए निचे प्रक्रिया दी गयी है आप उसे फॉलो करें(यह सारी प्रक्रिया ऑनलाइन भी हो जाती है):-

Nayi company ko register kaise kare
Nayi company ko register kaise kare
  • DIN(Director Identification Number) के लिए MCA पोर्टल पर अप्लाई करे
  • DSC(Digital Signature Certificates) के लिए MCA पोर्टल पर अप्लाई करे
  • कंपनी के नाम की MCA पोर्टल में मौजूदगी देखें
  • MoA(Memorandum of Association) और AOA(Article of Association) को ड्राफ्ट करें
  • MCA पोर्टल पर online SPICe(Simplified Proforma for Incorporating a Company Electronically) form भरें
  • E-stamp duty का भुगतान करें
  • ROC(Registrar of Companies) से incorporation certificate प्राप्त करें
  • कंपनी PAN card और TAN Card के लिए अप्लाई करें

आइये इन बिन्दुओं को विस्तार से जानते है.

DIN के लिए MCA पोर्टल पर अप्लाई करे

DIN (DIRECTOR IDENTIFICATION NUMBER) मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) द्वारा एक यूनीक आईडेंटिफिकेशन कोड होता है. एक भारतीय कंपनी को पंजीकृत करने के लिए सबसे पहले आदेवक DIN के लिए अप्लाई करे. DIN सरकार को किसी भी कंपनी के डायरेक्टर की पहचान करने में मदद करता है और साथ ही यह भी पता लगाने में भी मदद करता है की वो व्यक्ति पहले या बाद में किन किन कंपनियों में डायरेक्टर था/है.

किसी भी व्यक्ति को अगर किसी भी कंपनी का डायरेक्टर बनना है तो DIN के लिए अप्लाई करना पड़ता है. DIN को अप्लाई करने के लिए आवेदक को MCA Portal में जाकर इ-फॉर्म-DIR-3 भरना होता है.

MCA ने DIN एप्लीकेशन की फीस ₹500/- रखी गयी है.

DSC के लिए MCA पोर्टल पर अप्लाई करे

आपकी दूसरी स्टेप DSC(Digital Signature Certificate) प्राप्त करना है. अगर आप चाहते है की आपका रजिस्ट्रेशन का काम जल्दी हो जाये तो आपको यह सर्टिफिकेट प्राप्त करना बहुत आवश्यक होता है.

MCA पोर्टल में कंपनी के नाम की उपस्थिति की जांच करें

कंपनी के पंजीकरण की प्रक्रिया में तीसरा चरण होता है कंपनी का नाम ढूंडना. कंपनी का नाम बहुत महत्वपूर्ण होता है क्यूंकि आपका कारोबार लोग इसी नाम से जानेंगे.

कंपनी का नाम MCA पोर्टल में ढूंडना इसलिए जरूरी होता है क्यूंकी यदि आवेदक ने जो नाम उसकी कंपनी के लिए सोच कर रखा होगा और वही नाम किसी और ने पहले से पंजीकृत करा रखा होगा तो फिर वो नाम आवेदक अपनी कंपनी के लिए नहीं रख सकेगा.
इसलिए MCA पोर्टल के माध्यम से पहले ही आपका सोचा हुआ कंपनी का नाम सुनिश्चित कर लें के पहले से तो आपका सोचा हुआ नाम किसी और ने उपयोग में तो नही ले रखा.

यदि आवेदक का पसंद वाला नाम पहले से उपयोग में नहीं है तो आवेदक को उस नाम को आरक्षण करने के लिए FormINC-1 भरना होगा. यह फॉर्म पोर्टल पर उपलब्ध है. यह फॉर्म भरने के बाद आवेदक का बिज़नस/कंपनी नाम सुरक्षित हो जाता है अब यह नाम कोई दूसरा व्यक्ति बिज़नस के लिए पंजीकृत नहीं करा सकता.

MOA और AOA को ड्राफ्ट करें

मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन(MOA) और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन(AOA) दो मुख्य व्यावसायिक दस्तावेज हैं जो प्रत्येक कंपनी को कंपनी को पंजीकृत करते समय प्राप्त करना चाहिए. कंपनी अधिनियम 2015 के अनुसार, एक कंपनी के लिए कुछ मुख्य नियम और कानून लागू किए गए हैं.

इन दस्तावेजों का एक कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान होता है, इसलिए इन्हें किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की देखरेख में ही करवाएं.

दोनों दस्तावेजों में एक कंपनी द्वारा अपनाए गए दिशानिर्देशों, नियमों और विनियमों का पूरा विवरण दिया गया है. जो कंपनी अधिनियम 2015 के अनुसार अनिवार्य है. प्रत्येक कंपनी को कुछ मुख्य प्रकार के दस्तावेज तैयार करने के लिए एक वकील या चार्टर्ड एकाउंटेंट की आवश्यकता होती है.

MCA पोर्टल पर इनकारपोरेशन के लिए SPICe फॉर्म भरें

ऊपर की प्रक्रियाओं के बाद आपको MCA पोर्टल में जाकर एक और फॉर्म जमा कराना होता है जिसका नाम इनकारपोरेशन फॉर्म है(SPICe).

इसके अंतर्गत यदि आप वन पर्सन कंपनी(OPC) को पंजीकृत करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको ई-फॉर्म 2 INC-2  को उचित रूप से भरकर जमा कराना होगा. इसके अलावा अन्य प्रकार की कंपनियों के लिए आपको ई-फॉर्म INC-7 भरना होगा.

इ-स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करें

पंजीकरण फॉर्म(Registration form) की प्रक्रिया के दौरान आपसे एक राशि ली जाती है जिसे स्टाम्प ड्यूटी(e-stamp duty) कहा जाता है.

जब आपकी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो आपको एक चालान के साथ स्टैम्प ड्यूटी के भुगतान के बाद एक दस्तावेज दिया जाता है इसे आपको उस राज्य में कंपनी रजिस्ट्रार ऑफिस में दिखाना होता है जिस राज्य में आप अपनी कंपनी खोलने वाले है.

ROC से इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करें

जब आप पूरा फॉर्म भर देते हैं और इस पूरी प्रक्रिया के बाद जब आपके सभी दस्तावेज पूरे हो जाते हैं, तो आपके सभी दस्तावेजों की जांच की जाती है जिसमें लगभग 2 दिन लगते हैं.

अब आपको निगमन प्रमाणपत्र प्राप्त करने की आवश्यकता है, जिसके लिए आप एक सप्ताह के भीतर अपनी पंजीकृत ईमेल आईडी पर निगमन प्रमाणपत्र(इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट) प्राप्त कर सकते हैं.

जब आप अपनी ईमेल आईडी के माध्यम से निगमन प्रमाणपत्र(inorporation certificate) प्राप्त कर चुके हैं, तो आपको इसकी एक फोटोकॉपी अपने पास रखनी होगी, क्योंकि भविष्य में आपको सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उस प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी.

कंपनी PAN card और TAN card के लिए अप्लाई करें.

ये सारी प्रक्रियाओं के बाद अब आवेदक का रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज़(Registrar of Companies) में कंपनी रजिस्ट्रेशन हो चूका है इसलिए अब कंपनी का काम आगे बढ़ाने के लिए अपनी कंपनी के नाम से PAN Card बनाना होगा. PAN Card को प्राप्त करने के लिए आपको NSDL website पर ऑनलाइन अप्लाई करना होगा.

अब कंपनी रजिस्टर हो गयी है तो करमचारियों की भी तो ज़रुरत पड़ेगी, और उनको वेतन भी देना पड़ेगा और यदि किसी कर्मचारी का वेतन Income Tax के दायरे में आता है तो आवेदक को उसका TDS भी काटना पड़ेगा, इसलिए आवेदक को TAN Card के लिए भी अप्लाई करना होगा. इसे भी आप ऑनलाइन अप्लाई क्र सकते है.

FAQ: कंपनी रजिस्ट्रेशन(Company Registration) से सम्बंधित लोग यह भी पूछते है-

कंपनी रजिस्ट्रेशन को अप्रूव करने में MCA कितना समय लेता है?

आजकल भारत में कंपनी को रजिस्टर करने में ज्यादा समय नही लगता फिर भी प्रक्रिया को पूरा होने में अधिकतम 20-22 दिन का समय लगता है अगर आप पूरी प्रकिया अच्छी तरह से करते है और कंपनी रजिस्ट्रेशन के सम्बन्धी कागज़ाद जमा करा लेते है तो.
आप जितनी जल्दी अपनी कंपनी सम्बन्धी कागज़ाद जमा कराएँगे उतनी ही जल्दी सरकार से स्वीकृति मिलने की सम्भावना होती है.

किसी कंपनी में निदेशक(Director) बनने की योग्यता क्या होती है?

किसी भी कंपनी के निदेशक(director) बनने के लिए व्यक्ति की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए. उस व्यक्ति की शिक्षा नही देखि जाती, इसलिए एक अनपढ़ व्यक्ति भी किसी कंपनी का निदेशक बन सकता है. और जरूरी नही है की किसी भारतीय कंपनी में निदेशक कोई भारतीय नागरिक ही हो, कोई विदेशी नागरिक भी निदेशक बन सकता है.

कंपनी को रजिस्टर करने के लिए कितनी पूँजी चाहिए?

वेसे तो company को रजिस्टर करने के लिए कोई निश्चित पैसो की मात्रा तय नही की गयी है. कंपनी शुरू करने के लिए सरकार को फीस के तौर पर कम से कम 1 लाख रुपये शेयर के रूप में देना अनिवार्य है.

क्या कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए ऑफिस होना अनिवार्य है?

जी हाँ, company रजिस्ट्रेशन के लिए ऑफिस अनिवार्य है, PVT LTD, OPC या LLP company registration करते वक्त पत्राचार कार्यालय(correspondence office) और पंजीकृत कार्यालय(registered office) का पता भरना होता है.

Company कौनसी जगह पर खोलनी चाहिए?

Company शुरू करने के लिए एक जगह की आवश्यकता होती है, जहां से कंपनी का संचालन होता है. यह जगह कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और रेजिडेंशियल एरिया के अंदर भी हो सकती है.

निष्कर्ष(Conclusion)

दोस्तों आपने nayi company kaise shuru kare लेख में जाना की, कंपनी क्या होती है?(company kya hoti hai?), कंपनी के कितने प्रकार होते है (company ke prakaar), कंपनी की सुविधाएँ या विशेषताएँ क्या होती है(Company ki suvidhayen ya visheshtayen), नई कंपनी कैसे शुरू करते है(Nayi company kaise shuru karte hai), कंपनी को रजिस्टर कराना क्यों आवश्यक होता है(company ko register karana kyun important hota hai), कंपनी रजिस्टर करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ कौनसे होते है(Company Register karne ke liye important documents), नई कंपनी को पंजीकृत कैसे करें (Nayi company ko register kaise kare), और कंपनी रजिस्ट्रेशन(Company Registration) से सम्बंधित कुछ ऐसे सवाल जो की लोग पूछते है.

अगर आप भी एक कंपनी(company) खोलना चाहते है तो जो भी जानकारी हमने दी है उसको ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया करियेगा.

आशा करते है आपको हमारा ये लेख पसंद आया होगा, अगर आपकी पहचान में किसी व्यक्ति को अपनी खुद की कंपनी खोलना है, तो उनसे ये लेख ज़रूर साझा करें.

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